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August 2014

This story is about Delhi temple.

भावीवश १९४७ में देश का बंटवारा हो जाने से मंदिर श्री बाबा लालू जसराय (दिपालपुर) पाकिस्तान में रह गया| सब को पाकिस्तान छोड़ना पड़ा| पंडित चन्द्र मुनि जी महाराज के वंशज परम स्नेही पंडित गौरी शंकर जी झिगड़ परिवार सहित दिल्ली पहुचे और कई सम्बंधित परिवार भिन्न-भिन्न स्थानों पर कैम्पों में ठहरे| पंडित गौरी शंकर जी को भी दिल्ली, फतेहपुरी में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में टहरना पड़ा| छिपिवाडा में उनको बाबा जी के मंदिर की जानकारी थी| वे बाबा जी के मंदिर पधारे| वे क्षत्रिय वर्ग के खन्ना, सेठ, मेहरा तवार के दिन स्वयं माँ शुभमूर्ति जी बाबा जी के मंदिर में अरदास करने के लिए पधारती है| हम बाबे वाले पुरोहित पराम्भा शक्ति हिंगलाज नमता चंडिका के चरणों में माँ शुभमुर्ती जी के सदेव अच्छे स्वास्थ के लिए प्रार्थना करते है ताकि उनके भक्तो एवं समस्त जनता जनार्दन को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता रहे|
माँ शुभमूर्ति जी के आशीर्वाद से बहुत कम समय में श्री राधा कृष्ण मंदिर का जीर्णोधार हुआ| अब रात्रि को यात्रियों के ठहरने के लिए पर्याप्त स्थान है यात्रियों के लिए बिस्तरों इत्यादि का प्रबंध भी मंदिर की प्रबंधक कमेटी ही करती है तथा अन्य सुख सुविधा प्राप्त करवाती है| श्री राज कपूर एवं भोली पंडित पराशर के विशेष सहयोग से इस मंदिर का जीर्णोधार हुआ है|
..एवं कपूर सेवको से मिले| सेवको में वयोवृद्ध ला. ज्योति प्रसाद खन्ना,

तुंरत सभी सेवको की एक मीटिंग बुलाई गई जिस में पंडित गौरी शंकर जी झिन्गड़ भी उपस्थित थे और सर्व सम्मति से यह निश्चय किया गया की इसी महीने से यह शुभ कार्य प्रारंभ कर दिया जाये| इसके साथ ही बाबा लालू जसराय जी के चरणों में प्रार्थना की गई की आप माघ के महीने में माता हिंगलाज से आशीर्वाद लेकर इसी छिप्पिवाडा मंदिर में पधारे और अपने सेवको की मनोकामनाओ को पूरा करे| तत्पश्चात पंडित गौरी शंकर जी ने मुझे (वेद प्रकाश झिन्गड़ बाबे वाले) पंडित प्यारे लाल जी झिन्गड़, पंडित राम प्रकाश जी झिन्गड़ को सूचित किया की आप तत्काल दिल्ली पहुचे तथा सर्व सम्मति से यह निश्चय हुआ है की बाबा जी माघ मेला इसी वर्ष १९४८ से छिप्पिवाडा कलां दिल्ली स्थित, बाबा जी के मंदिर मनाया जाये|

Akash Kapoor

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